* मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का महाअभियान 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक चलेगा
* 62,000 से अधिक लोगों ने स्व-गणना में लिया भाग; देहरादून जिला रहा अग्रणी
* 20,859 प्रगणक एवं 3,670 पर्यवेक्षक पूरी तरह प्रशिक्षित और तैनात
* देहरादून में 10,884 लोगों ने स्व-गणना की
* उत्तराखंड में मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना में तक़रीबन 30,000 प्रगणकों तथा पर्यवेक्षकों की होगी नियुक्ति
* मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना में तक़रीबन 32,000 मकानसूचीकरण ब्लाकों में घर-घर जाकर गणना की जाएगी
देहरादून: शुक्रवार को जनगणना कार्य निदेशालय, गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जनगणना 2027 के प्रथम चरण—मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना की तैयारियों को लेकर एक प्रेस वार्ता पीआईबी देहरादून के सहयोग से आयोजित की गई। इस अवसर पर इवा आशीष श्रीवास्तव, निदेशक (जनगणना कार्य निदेशालय, गृह मंत्रालय, भारत सरकार) ने मीडिया को संबोधित करते हुए अब तक की प्रगति की विस्तृत जानकारी दी।
इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तराखंड में 10 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 के बीच 62,000 से अधिक नागरिकों ने डिजिटल माध्यम से स्व-गणना पूरी की। इसमें देहरादून जिला अग्रणी रहा, जहाँ 10,884 लोगों ने स्व-गणना की। उत्तराखंड में जनगणना कार्य के सफल संचालन हेतु 20,859 प्रगणकों तथा 3,670 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है। इन सभी को 555 प्रशिक्षण बैंचों में विभाजित कर पूर्णतः प्रशिक्षित किया गया है, जिसमें विशेष रूप से विकसित एचएलओ मोबाइल एप पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी शामिल है।
डिजिटल नवाचार के तहत एचएलबीसी पोर्टल के माध्यम से पूरे राज्य को 29,567 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स में विभाजित कर उनके डिजिटल मानचित्र तैयार किए गए हैं। इन मानचित्रों का उपयोग प्रगणक फील्ड कार्य के दौरान करेंगे। इस कार्य को समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिए सभी जिलाधिकारियों, अधिकारियों एवं जिला समन्वयकों की सराहना की गई। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक हाउस लिस्टिंग ब्लॉक का आवंटन सीएमएमएस पोर्टल के माध्यम से पूरी तरह डिजिटल रूप में किया गया है। प्रगणक जैसे ही मोबाइल एप पर लॉगिन करेंगे, उन्हें अपने आवंटित क्षेत्र की जानकारी मानचित्र सहित प्राप्त होगी।
निदेशक जनगणना कार्य निदेशालय इवा आशीष श्रीवास्तव ने घोषणा करते हुए कहा कि 25 अप्रैल 2026 से “हर द्वार, दस्तक” अभियान के तहत पूरे राज्य में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य प्रारंभ होगा, जो 24 मई 2026 तक चलेगा। उन्होंने बताया कि यह चरण जनगणना 2027 की आधारशिला है, जिसके अंतर्गत प्रगणक प्रत्येक घर और भवन का दौरा कर 33 प्रश्नों के माध्यम से सुविधाओं एवं परिसंपत्तियों से संबंधित डेटा एकत्र करेंगे। यह जनगणना भारत के इतिहास में पहली बार पूर्णतः मोबाइल एप आधारित डिजिटल प्रणाली के माध्यम से संपन्न की जा रही है, जो डिजिटल इंडिया अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इवा आशीष ने जनता से अपील करते हुए कहा कि इस दौरान साइबर धोखाधड़ी से बचने वालों की लेकर भी प्रदेश में काम कर रहे हैं। प्रेस वार्ता के अंत में निदेशक इवा आशीष ने राज्य के सभी नागरिकों से अपील की कि वे प्रगणकों को पूर्ण सहयोग प्रदान करें और सही जानकारी देकर इस राष्ट्रीय महत्व के अभियान को सफल बनाने में योगदान दें। इस अवसर पर भारत सरकार के जनगणना निदेशालय से एस. एस. नेगी (संयुक्त निदेशक), तान्या सेठ (उप निदेशक), आर. के. बनवारी (उप निदेशक), प्रवीण कुमार (उप निदेशक) सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।
