उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027: भाजपा ने शुरू किया जीताऊ उम्मीदवारों का सर्वे, कांग्रेस जून से होगी सक्रिय

देहरादून: उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पांच राज्यों के चुनाव संपन्न होने के बाद अब भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल आगामी चुनावी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने और मौजूदा राजनीतिक स्थिति का आकलन करने के लिए दोनों पार्टियां लगातार सर्वे और संगठनात्मक गतिविधियों पर जोर दे रही हैं। भाजपा जहां कई विधानसभा क्षेत्रों में दो दौर का सर्वे करा चुकी है, वहीं कांग्रेस भी आंतरिक स्तर पर चुनावी फीडबैक जुटाने में लगी हुई है।

पश्चिम बंगाल और असम में मिली सफलता के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है। पार्टी अब उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश भाजपा संगठन ने ग्राउंड स्तर पर समीक्षा अभियान तेज कर दिया है। दूसरी ओर कांग्रेस भी संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने के प्रयास में जुटी हुई है। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा लगातार जिलों का दौरा कर कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रही हैं।

साल 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न माना जा रहा है। भाजपा जहां सत्ता में हैट्रिक लगाने की कोशिश में जुटी है, वहीं कांग्रेस पिछले एक दशक से सत्ता से बाहर रहने के बाद वापसी की रणनीति तैयार कर रही है। दोनों दल अपने-अपने स्तर पर जीत का दावा कर रहे हैं। भाजपा ने आगामी चुनाव में 60 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है, जबकि कांग्रेस 50 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।

चुनावी वर्ष राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जनता के मुद्दों को लेकर रणनीति तैयार की जाती है। भाजपा अपने मौजूदा विधायकों की स्थिति, जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता और जीत की संभावनाओं को लेकर सर्वे करवा रही है। पार्टी उन सीटों पर भी विशेष फोकस कर रही है, जहां 2022 में हार का सामना करना पड़ा था।

वहीं कांग्रेस भी जून के बाद संगठनात्मक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों को और तेज करने की तैयारी में है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस विभिन्न श्रेणियों में विधानसभा सीटों का आकलन कर अलग-अलग रणनीति तैयार करेगी। जिन सीटों पर पार्टी कम अंतर से हारी थी, वहां विशेष अभियान चलाया जाएगा, जबकि कमजोर सीटों पर नए समीकरण और स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करने पर फोकस रहेगा।

भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान का कहना है कि संगठन समय-समय पर अपने कार्यों की समीक्षा करता है। इसमें सरकारी योजनाओं की स्थिति, जनप्रतिनिधियों के कार्य और संगठन की मजबूती जैसे पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर सुधार वाले क्षेत्रों की पहचान कर आगे की रणनीति बनाई जा रही है।

कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि चुनाव से पहले कई स्तर पर सर्वे कराए जाते हैं। कांग्रेस आलाकमान भी अपने स्तर पर गोपनीय फीडबैक लेता है। पार्टी का लक्ष्य प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों का वर्गीकरण कर रणनीतिक तरीके से चुनाव लड़ना है, ताकि 2027 में कांग्रेस मजबूत वापसी कर सके।