बयानबाजी और गुटीय राजनीति से बचें कांग्रेस कार्यकर्ता: कुमारी शैलजा

चमोली: उत्तराखंड में अगले साल 2027 के शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीति पार्टियों ने अपनी कमर कस ली है। कांग्रेस हो बीजेपी दोनों ही दल चुनावी रंग में रंगे हुए नजर आ रहे है। इसी क्रम में शनिवार को चमोली पहुंची उत्तराखंड कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जोश भरा है। साथ ही बीजेपी सरकार पर भी निशाना साधा।

इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष चमोली सुरेश डिमरी, प्रीतम सिंह, यशपाल आर्य, हरक सिंह रावत, लखपत बुटोला सहित कई वरिष्ठ नेता मंच पर मौजूद रहे है। इस दौरान प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने कहा कि राज्य में बदलाव की बयार चल पड़ी है। लोग कांग्रेस की ओर टकटकी निगाहें लगाए बैठे हैं। अब कांग्रेस के खड़े होने का वक्त आ गया है।

शैलजा ने कहा कि उत्तराखंड की जनता बदलाव की मूड़ में है। इसलिए कांग्रेस की सरकार बनाने को लेकर लोगों में छटपटाहट देखने को मिल रही है। भाजपा से लोगों को कोई उम्मींद नहीं रह गई है। इसलिए अब वक्त कांग्रेस के खड़े होने का आ गया है। भाजपा के राज में क्षेत्रीय पार्टियों का अस्तित्व समाप्ति की ओर चला जा रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी देश के सवालों को लेकर लड़कर सरकार को आईना दिखा रहे हैं। इसके चलते भाजपा संसद में राहुल गांधी को बोलने ही नहीं दे रही है।

शैलजा ने कहा कि अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे सरकार को ललकार रहे हैं। विपक्ष का दायित्व जनता के सवालों को उठाना है, किंतु राहुल गांधी असलियत बोल रहे हैं तो उन्हें बोलने ही नहीं दिया जा रहा। शैलजा ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आम लोगों के बीच जाने को कहा है। ताकि जमीन पर कांग्रेस की पकड़ मजबूत हो। साथ ही जनता का विश्वास भी कांग्रेस के प्रति बने। भाजपा का तो लोकतंत्र में विश्वास ही नहीं रह गया है।

शैलजा का आरोप है कि सरकारी मशीनरी के बल पर लोकतंत्र को कुचला जा रहा है। अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को कमरकश कर मैदान में उतरने की नसीहत दी। कहा कि जनसरोकारों से जुड़े सवालों को लेकर कार्यकर्ताओं को संघर्ष की भूमिका में रहना होगा। इसके बल पर ही कांग्रेस आम जनता के दिलों में पैठ बना सकेगी।

शैलजा ने कहा कि पार्टी प्रत्याशी नहीं अपितु कांग्रेस को सत्ता में लाने का जिम्मा कार्यकर्ताओं का होगा। इसलिए उन्हें गुटीय वर्चस्व से दूर रहकर कांग्रेस की सत्ता में वापसी के लिए समर्पित होकर काम करना होगा। बड़े नेताओं में तो गिले शिकवे होते रहते हैं, किंतु कार्यकर्ताओं में गिले शिकवे नहीं होते। इसलिए बड़े नेताओं को भी किसी तरह की बयानबाजी में संयम बरत कर अनुशासन को कायम रखना चाहिए। इसका असर सीधे कार्यकर्ताओं पर पड़ता है। कार्यकर्ताओं को उत्साह से लबरेज करने की दिशा में काम करना होगा। इसमें ही कांग्रेस का भविष्य निर्भर करेगा।

कहा कि सिर पर आया विधानसभा चुनाव सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। अब देखना यह है कि कांग्रेस कार्यकर्ता अपने प्रदेश प्रभारी के निर्देशों को किस तरह अमल में लाते है। इस पर ही कांग्रेस का भविष्य निर्भर करेगा।