हिरासत से छूटने के बाद ममता बनर्जी का आरोप, बोलीं- पुलिस ने 2 घंटे तक घुमाया

नयी दिल्ली: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वह अभिजीत दीपके के बुलावे पर दिल्ली में जंतर-मंतर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने जाना चाहती थीं। दीपके ने उन्हें कई बार कार्यक्रम में आने के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन पहले उन्हें वहां जाने का मौका नहीं मिला। इस बार दिल्ली आने पर उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होने का फैसला किया। ममता ने बताया कि इंडिया गठबंधन का भी एक कार्यक्रम था। जब वे अपने आवास पर पहुंचीं, तो उन्होंने बाहर तैनात पुलिसकर्मियों से पूछा कि क्या उन्हें जंतर-मंतर जाने दिया जाएगा। पुलिस ने साफ कह दिया कि उन्हें वहां जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी और रास्ते में रोक लिया जाएगा। ममता ने कहा कि अगर किसी का मुद्दा जायज है, तो सभी को उसका समर्थन करना चाहिए।

ममता बनर्जी ने बताया कि जब उन्हें आगे जाने से रोका गया, तो वे अपने आवास के सामने बस स्टैंड पर बैठ गईं। उनका कहना था कि वे सिर्फ प्रदर्शनकारियों के समर्थन में वहां पहुंची थीं। इसी दौरान पुलिसकर्मी आए और कहने लगे कि तीन लोगों से ज्यादा को एक साथ बैठने की अनुमति नहीं है। इसके बाद वे तीन-तीन लोगों के समूह में दूरी बनाकर बैठ गईं। ममता के मुताबिक, एक मिनट के भीतर ही पुलिस ने उन्हें वहां से जबरन हटा दिया और जेल वैन में बैठाकर ले गई। उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जैसे वे कोई वांछित अपराधी हों। ममता ने दावा किया कि उन्होंने अपनी जिंदगी में पहले कभी इस तरह की कार्रवाई का सामना नहीं किया था, जब उन्हें गिरफ्तार कर पुलिस वैन में बैठा दिया गया हो।

जैसे अपहरण कर लिया हो: ममता बनर्जी

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें करीब 2 घंटे तक अलग-अलग जगहों पर घुमाती रही। उन्हें एक थाने से दूसरे थाने और फिर तीसरे थाने ले जाया गया, लेकिन हर जगह पुलिस ने कहा कि वहां जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि एक समय उन्हें ऐसा महसूस होने लगा, जैसे उनका अपहरण कर लिया गया हो। ममता ने सवाल उठाया कि अगर लोगों को सड़क पर चलने, बैठने और अपनी बात रखने तक की इजाजत नहीं दी जाएगी, यहां तक कि मीडिया को भी कार्यक्रम की कवरेज से रोका जाएगा, तो ऐसी स्थिति में लोकतंत्र किसके लिए है? उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से आंदोलन को दबाया नहीं जा सकता, बल्कि इससे आंदोलन का महत्व और बढ़ जाता है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को रोकने के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा बंदोबस्त किए गए। कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके, 4 पूर्व मुख्यमंत्रियों और यूट्यूबर ध्रुव राठी समेत 7 हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल जंतर-मंतर पूरे दिन सुनसान नजर आया। प्रदर्शनकारियों को इलाके से दूर रखने के लिए लुटियन दिल्ली में 30 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई और कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए गए। विपक्षी दलों ने स्थिति की तुलना आपातकाल से भी बदतर हालात से की है।

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