पटना: बिहार में यूनिवर्सिटी और कॉलेज के शिक्षक एवं कर्मचारियों के आंदोलन के बाद सरकार एक्टिव हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर को मां सीता महिला विश्वविद्यालय के मामले में आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। सीएम ने कहा कि नई महिला यूनिवर्सिटी पर फैसला सभी हितधारकों से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा। दरअसल, मां सीता विश्वविद्यालय के विरोध में शनिवार को राज्य भर के विश्वविद्यालय शिक्षक-कर्मचारी ने पटना में प्रदर्शन किया। जेडी वीमेंस कॉलेज से शुरू हुए लोकभवन मार्च को पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान पुलिस से झड़प और धक्का-मुक्की हुई। 21 शिक्षक और कर्मियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। लोकभवन मार्च का आह्वान बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले हुआ।
इसके पहले शिक्षक और कर्मियों ने अधिनियम 2026 के अंतर्गत माता सीता एवं दिनकर विश्वविद्यालय में परंपरागत महाविद्यालयों को शामिल किए जाने के विरोध में जेडी वीमेंस कॉलेज में प्रदर्शन किया और जमकर नारे लगाए। इसके बाद शिक्षकों का जुलूस कॉलेज से लोकभवन मार्च के लिए निकला, लेकिन पुलिस मुख्यालय के पास ही बैरेकेडिंग लगाकर इन्हें रोक दिया गया। आगे बढ़ने पर आमादा शिक्षकों की पुलिस के साथ तीखी नोकझोंक और झड़प हुई।
बिहार में यूनिवर्सिटी टीचर आंदोलन क्यों कर रहे?
शिक्षकों का आरोप है कि हाल ही में सदन से पारित हुए विशिष्ट विश्वविद्यालय कानून में मौजूदा यूनिवर्सिटी की स्वायत्ता समाप्त करने की साजिश है। पटना के महिला कॉलेजों का माता सीता यूनिवर्सिटी में विलय किया जा रहा है, जिससे मौजूदा विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त होगी। यूनिवर्सिटी शिक्षकों का कहना है कि ऐसे निर्णय बंद कमरे में नहीं होते, बल्कि सभी हितधारकों से विचार विमर्श होना चाहिए। महिला यूनिवर्सिटी की जगह मौजूदा विश्विद्यालय को मजबूत करना चाहिए।
संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने कहा कि माता सीता के नाम पर राजनीति नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए। मोर्चा की मांग है कि परंपरागत महाविद्यालयों को नए विश्वविद्यालयों में शामिल करने के बजाय उनकी वर्तमान संबद्धता एवं स्वायत्तता को बरकरार रखा जाए। मोर्चा ने मार्च को रोके जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह शिक्षकों-कर्मियों के लोकतांत्रिक अधिकार पर हमला है। जेडी वीमेंस कॉलेज के पास एसडीएम कृतिका मिश्रा की अगुआई में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे।
कॉलेज का गेट बंद किया, प्रदर्शकारियों को थाने ले गई पुलिस
कॉलेज परिसर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के बाद जैसे ही शिक्षक लोकभवन मार्च को निकले, कॉलेज का मुख्य द्वार बंद कर दिया गया। इससे शिक्षक और उग्र हो गए। शिक्षकों के विरोध पर गेट खोला गया। लेकिन आगे बढ़ने पर कई शिक्षकों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। 50 से अधिक शिक्षक-कर्मियों को पुलिस ने गाड़ी में बिठाकर जिले के अलग-अलग थानों में ले जाकर रखा। हालांकि बाद में उन्हें थाने से छोड़ दिया गया।
आरोप: झड़प में कई महिला शिक्षक को चोट लगी:
संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अनुसार, इस कार्रवाई में कई महिला शिक्षकों एवं कर्मचारियों सहित अन्य प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं, जिनमें कुछ को गंभीर चोटें भी लगीं। प्रदर्शन में गंगा प्रसाद झा, प्रो. संतोष कुमार, प्रो. शैलेश कुमार, वेंकटेश कुमार, रोहित कुमार, त्रिपुरारी प्रसाद, दीपक कुमार, विश्वजीत कुमार, सुशील कुमार, प्रो. प्रिया, प्रो. बृजबाला, प्रो. मंजरी नाथ सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी शामिल हुए।
चर्चा के बाद ही होगा मां सीता यूनिवर्सिटी पर फैसला- सम्राट चौधरी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि बिहार में प्रस्तावित मां सीता महिला विश्वविद्यालय को लेकर कोई भी निर्णय संबंधित हितधारकों के साथ विचार-विमर्श और उनके सुझावों को ध्यान में रखते हुए ही लिये जाएं। उन्होंने इस संबंध में उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर को अपेक्षित कार्रवाई का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रस्तावित मां सीता महिला विश्वविद्यालय से जुड़े सभी हितधारकों के साथ बैठक की जाए। बैठक में उनके सुझावों और विचारों को ध्यान में रखते हुए ही आगे की कार्रवाई की जाए। इसके बाद प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रस्तावित विश्वविद्यालय के संबंध में कोई निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल विश्वविद्यालय को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
सम्राट ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में चल रही बिहार विधान परिषद चुनाव की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही हितधारकों के साथ विचार-विमर्श और आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
