पिटकुल निदेशक भर्ती विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, संशोधित सेवा नियमों पर मांगा जवाब

नैनीताल: पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) में निदेशक पद की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े संशोधित सेवा नियमों को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि भर्ती नियमों में बताई गई त्रुटि को सुधारने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

मामला अनुपम सिंह बनाम प्रमुख सचिव ऊर्जा विभाग एवं अन्य से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रियंका अग्रवाल ने अदालत को बताया कि संशोधित भर्ती नियमों में निदेशक पद के लिए वही अभ्यर्थी पात्र माना गया है, जिसने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में चीफ इंजीनियर, जनरल मैनेजर या उससे उच्च पद पर कार्य किया हो। जबकि पुराने नियमों में केवल चीफ इंजीनियर, जनरल मैनेजर या समकक्ष पद का अनुभव ही पर्याप्त था और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में होना अनिवार्य नहीं था।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि पिटकुल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में चीफ इंजीनियर या जनरल मैनेजर का कोई पद मौजूद ही नहीं है। ऐसे में संशोधित नियम योग्य अधिकारियों को चयन प्रक्रिया से बाहर कर सकते हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष वर्ष 2026 में दाखिल एक पूर्व जवाबी हलफनामे का भी उल्लेख किया गया, जिसमें राज्य सरकार ने माना था कि नियमों में “अनजाने में त्रुटि” रह गई है और उसे सुधारने की प्रक्रिया जारी है।

खंडपीठ ने राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है कि भर्ती नियमों में संशोधन की दिशा में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और यह त्रुटि कब तक दूर की जाएगी। साथ ही हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि जब तक नियमों की खामी दूर नहीं हो जाती, तब तक पिटकुल में निदेशक पद पर भर्ती के लिए कोई नया विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 25 मई को निर्धारित की गई है।